
गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत भवारी खुर्द स्थित खानकाह के सज्जादानशीन एवं सूफी संत हजरत शबीर मलिक अहमद अस्वी का शनिवार की रात निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। पीर साहब को चाहने वाले सैकड़ों अनुयायियों और श्रद्धालुओं के लिए यह खबर बेहद दुखद और दिल को झकझोर देने वाली रही।
उत्तर प्रदेश से कोलकाता और फिर भवारी खुर्द तक का सफर
हजरत शबीर मलिक अहमद अस्वी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे। बताया जाता है कि करीब 20 से 25 वर्ष पहले वे भवारी खुर्द पहुंचे थे। इससे पहले वे कोलकाता में रहते थे। समय के साथ उन्होंने भवारी खुर्द को अपनी कर्मभूमि बना लिया और अपनी जीवनभर की कमाई यहां एक भव्य एवं सुंदर खानकाह के निर्माण में लगा दी।
पीर साहब ने अपनी आध्यात्मिक साधना और सेवा के माध्यम से सैकड़ों अनुयायियों को अपने साथ जोड़ा। धीरे-धीरे यह खानकाह उनकी आस्था, साधना और आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गई। दूर-दूर से लोग उनके दर्शन करने और उनसे आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए पहुंचते थे।

पत्नी के निधन के बाद खानकाह में ही बिता रहे थे जीवन
पीर साहब के जीवन से जुड़ी एक भावुक कर देने वाली बात भी सामने आई है। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ खानकाह परिसर में ही अपने जीवनकाल में दोनों के लिए कब्रों का निर्माण कराया था। उनकी पत्नी का करीब तीन वर्ष पहले निधन हो गया था। पत्नी के निधन के बाद पीर साहब खानकाह में ही अपनी आध्यात्मिक साधना और जीवन व्यतीत कर रहे थे।
शनिवार की रात उनके निधन की खबर मिलते ही उनके अनुयायियों और चाहने वालों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। जिस खानकाह को उन्होंने अपनी पूरी कमाई और जीवन की मेहनत से सजाया-संवारा था, उसी खानकाह से उनका गहरा जुड़ाव रहा।
पीर साहब के निधन से आध्यात्मिक जगत को अपूरणीय क्षति
हजरत शबीर मलिक अहमद अस्वी का जीवन भवारी खुर्द की खानकाह और उनके अनुयायियों के साथ गहराई से जुड़ा रहा। उनके निधन से उनके चाहने वालों ने एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक को खो दिया है। उनके द्वारा स्थापित खानकाह आने वाले समय में भी उनकी यादों और आध्यात्मिक योगदान की गवाह बनी रहेगी।
